श्याम बेनेगल भारतीय सिनेमा के एक प्रतिष्ठित निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता हैं। उनका जन्म 14 दिसंबर 1934 को हुआ था। श्याम बेनेगल को भारतीय समानांतर सिनेमा (Parallel Cinema) के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में जाना जाता है। उनके कार्यों ने सामाजिक मुद्दों, कुरीतियों और मानव जीवन के विविध पहलुओं को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। श्याम बेनेगल के सराहनीय कार्य सामाजिक मुद्दों पर फिल्में श्याम बेनेगल की फिल्मों का मुख्य फोकस समाज में मौजूद समस्याओं और कुरीतियों को उजागर करना रहा। उन्होंने ग्रामीण भारत, वर्ग संघर्ष, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर गहन दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनकी प्रसिद्ध फिल्में-अंकुर (1974) यह फिल्म ग्रामीण जीवन और वर्ग संघर्ष पर आधारित है। निशांत (1975) इसमें महिलाओं के उत्पीड़न और सामंती शोषण को दिखाया गया है। मंथन (1976) यह फिल्म श्वेत क्रांति और ग्रामीण सहकारी आंदोलन पर आधारित थी। इसे भारत के किसानों ने आर्थिक सहायता दी थी। भूमिका (1977)इसमें एक अभिनेत्री के संघर्ष और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कहानी है। महिला सशक्तिकरण उनकी फिल्मों में महिलाओं के अधिकार, उनकी स्वतंत्रता और उनके संघर्षों को प्रमुखता से दिखाया गया। उदाहरण: "भूमिका" और "सरदारी बेगम"। इतिहास और भारतीय संस्कृति पर फिल्में श्याम बेनेगल ने भारतीय इतिहास और संस्कृति पर आधारित कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्में बनाईं। भारत एक खोज (1988)यह प्रसिद्ध टेलीविजन श्रृंखला जवाहरलाल नेहरू की किताब *डिस्कवरी ऑफ इंडिया* पर आधारित थी, जिसमें भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री बनाई जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित थीं। उनके टेलीविजन शो, जैसे यात्रा भी दर्शकों में काफी लोकप्रिय हुए। उनके कार्यों की विशेषताएँ यथार्थवादी दृष्टिकोण श्याम बेनेगल की फिल्में वास्तविकता के करीब होती हैं और आम जनजीवन की समस्याओं को दिखाती हैं। अभिनय की प्रामाणिकता उनकी फिल्मों में अभिनेता और अभिनेत्रियां अपनी भूमिकाओं में अत्यंत स्वाभाविक और प्रामाणिक लगते हैं। उन्होंने शबाना आज़मी, स्मिता पाटिल, और नसीरुद्दीन शाह जैसे महान कलाकारों को मंच दिया। संदेशप्रद उनकी फिल्मों में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और बदलाव का संदेश होता है। सम्मान और पुरस्कार श्याम बेनेगल को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। उन्हें पद्म श्री,(1976) और पद्म भूषण, (1991) से सम्मानित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में भी कई बार जीत दर्ज की। निष्कर्ष श्याम बेनेगल का योगदान न केवल भारतीय सिनेमा बल्कि समाज को जागरूक और संवेदनशील बनाने में भी अहम है। उनकी फिल्में आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं। अभिप्राय मिडिया फाउंडेशन के चेयरमैन मैन फाउंडर अभिज्ञान आशीष मिश्रा ने पद्म श्री श्याम बेनगल का यू अचानक चला जाना सीनेमा जगत कों बहुत बड़ा नुकसान हैँ उनकी फिल्मो मे सामजिक व्यवस्था कुरीतियों वा महिलाओ के उत्पीड़न के मुद्दे शामिल हैँ उनकी पटकथा, लेखन, वा निर्मित फिल्मो मे गंभीर सामजिक विषयों कों लेकर लोगो कों जाग्रत करने का काम किया जो की नई पीढ़ी के निर्माता निदेशक के लिये सीख हैँ।
Abhigyan Ashish Mishra
Founder & Chairman